JEE MAIN - Physics Hindi (2017 (Offline))
- 2एक $$25 \mathrm{~cm}$$ परिमाण की फोकस दूरी के अपसारी लेन्स को एक $$20 \mathrm{~cm}$$ परिमाण की फोकस दूरी के अभिसारी लेन्स से $$15 \mathrm{~cm}$$ की दूरी पर रखा जाता है। एक समांतर प्रकाश पुंज अपसारी लेंस पर आपतित होता है। परिणामी प्रतिबिम्ब होगा :Atsakymas(B)आभासी और अभिसारी लेंस से $$40 \mathrm{~cm}$$ दूरी पर
- 3यंग के एक द्विझिरी प्रयोग में, झिरियों के बीच की दूरी $$0.5 \mathrm{~mm}$$ एवं पर्दे की झिरी से दूरी $$150 \mathrm{~cm}$$ है। एक प्रकाश पुंज, जिसमें $$650 \mathrm{~nm}$$ और $$520 \mathrm{~nm}$$ की दो तरंगदैर्ध्य हैं, को पर्दे पर व्यतीकरण फ्रिन्ज बनाने में उपयोग करते हैं। उभयनिष्ठ केन्द्रीय उच्चिष्ठ से वह बिन्दु, जहाँ दोनों तरंगदैर्ध्यों की दीप्त फ्रिन्जें सम्पाती होती है, की न्यूनतम दूरी होगी :Atsakymas(C)$$9.75 \mathrm{~mm}$$
- 5$$15 ~\Omega$$ के कुण्डली प्रतिरोध के गैल्वेनोमीटर से जब $$5 \mathrm{~mA}$$ की धारा प्रवाहित की जाती है तो वह पूर्ण स्केल विक्षेप दर्शाता है। इसे $$0-10 \mathrm{~V}$$ परास के विभवमापी में बदलने के लिये किस मान के प्रतिरोध को गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणी क्रम में लगाना होगा ?Atsakymas(B)$$2.045 \times 10^{3} ~\Omega$$
- 10एक विद्युत द्विध्रुव का स्थिर द्विध्रुव आघूर्ण $$\vec{p}$$ है जो कि $$x$$-अक्ष से $$\theta$$ कोण बनाता है। विद्युत क्षेत्र $$\overrightarrow{\mathrm{E}}_{1}=\mathrm{E} \hat{i}$$ में रखने पर यह बल आघूर्ण $$\overrightarrow{\mathrm{T}}_{1}=\tau \hat{k}$$ का अनुभव करता है। विद्युत क्षेत्र $$\overrightarrow{\mathrm{E}}_{2}=\sqrt{3} \mathrm{E}_{1} \hat{j}$$ में रखने पर यह बल आघूर्ण $$\overrightarrow{\mathrm{T}}_{2}=-\overrightarrow{\mathrm{T}}_{1}$$ का अनुभव करता है। कोण $$\theta$$ का मान होगा :Atsakymas(D)$$90^{\circ}$$
- 11
एक विद्युत परिपथ में एक $$2 ~\mu \mathrm{F}$$ धारिता के संधारित्र को $$1.0 \mathrm{~kV}$$ विभवान्तर के बिन्दुओं के बीच लगाना है। $$1 ~\mu \mathrm{F}$$ धारिता के बहुत सारे संधारित्र जो कि $$300 \mathrm{~V}$$ विभवान्तर तक वहन कर सकते हैं, उपलब्ध हैं।
उपरोक्त परिपथ को प्राप्त करने के लिये न्यूनतम कितने संधारित्रों की आवश्यकता होगी ?
Atsakymas(C)$$24$$ - 12$$\mathrm{X}$$-किरणें उत्पन्न करने के लिये एक इलैक्ट्रॉन किरणपुँज को विभवान्तर $$\mathrm{V}$$ से त्वरित करके धातु की प्लेट पर आपतित किया जाता है। इससे विविक्त (characteristic) एवं अविरत (continuous) $$\mathrm{X}$$-किरणें उत्पन्न होती हैं। यदि $$\mathrm{X}$$-किरण स्पेक्ट्रम में न्यूनतम संभव तरंगदैर्ध्य $$\lambda_{\min }$$ है तो $$\log \lambda_{\min }$$ का $$\log \mathrm{V}$$ के साथ बदलाव किस चित्र में सही दिखाया गया है ?Atsakymas(B)
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- 13
स्थिर दाब तथा स्थिर आयतन पर विशिष्ट ऊष्मायें क्रमश: $$\mathrm{C}_{p}$$ तथा $$\mathrm{C}_{v}$$ हैं। पाया जाता है कि
हाइड्रोजन के लिये, $$\mathrm{C}_{p}-\mathrm{C}_{v}=\mathrm{a}$$
नाइट्रोजन के लिये, $$\mathrm{C}_{p}-\mathrm{C}_{v}=\mathrm{b}$$
$$\mathrm{a}$$ और $$\mathrm{b}$$ के बीच का सही सम्बन्ध होगा :
Atsakymas(D)$$\mathrm{a=28 ~b}$$ - 14सूर्य की किरणों से एक खुले हुए $$30 \mathrm{~m}^{3}$$ आयतन वाले कमरे का तापमान $$17^{\circ} \mathrm{C}$$ से बढ़कर $$27^{\circ} \mathrm{C}$$ हो जाता है। कमरे के अन्दर वायुमंडलीय दाब $$1 \times 10^{5} \mathrm{~Pa}$$ ही रहता है। यदि कमरे के अन्दर अणुओं की संख्या गर्म होने से पहले एवं बाद में क्रमश: $$\mathrm{n}_{i}$$ व $$\mathrm{n}_{f}$$ हैं तो $$\mathrm{n}_{f}-\mathrm{n}_{i}$$ का मान होगा :Atsakymas(D)$$-2.5 \times 10^{25}$$
- 15$$0^{\circ} \mathrm{C}$$ पर रखे हुए एक घन पर एक दबाव $$\mathrm{P}$$ लगाया जाता है जिससे वह सभी तरफ से बराबर संपीडित होता है। घन के पदार्थ का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक $$\mathrm{K}$$ एवं रेखीय प्रसार गुणांक $$\alpha$$ है। यदि घन को गर्म करके मूल आकार में लाना है तो उसके तापमान को कितना बढ़ाना पड़ेगा ?Atsakymas(A)$$\frac{\mathrm{P}}{3 \alpha \mathrm{K}}$$
- 16
$$100 \mathrm{~gm}$$ द्रव्यमान वाला ताँबे के एक गोले का तापमान $$\mathrm{T}$$ है। उसे एक $$170 \mathrm{~gm}$$ पानी से भरे हुए $$100 \mathrm{~gm}$$ के ताँबे के कैलोरीमीटर, जोकि कमरे के तापमान पर है, में डाल दिया जाता है। तत्पश्चात् निकाय का तापमान $$75^{\circ} \mathrm{C}$$ पाया जाता है। $$\mathrm{T}$$ का मान होगा :
(दिया है : कमरे का तापमान $$=30^{\circ} \mathrm{C}$$, ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा $$=0.1 \mathrm{~cal} / \mathrm{gm}^{\circ} \mathrm{C}$$ )
Atsakymas(C)$$1250^{\circ} \mathrm{C}$$ - 17
$$100 \mathrm{~gm}$$ द्रव्यमान वाला ताँबे के एक गोले का तापमान $$\mathrm{T}$$ है। उसे एक $$170 \mathrm{~gm}$$ पानी से भरे हुए $$100 \mathrm{~gm}$$ के ताँबे के कैलोरीमीटर, जोकि कमरे के तापमान पर है, में डाल दिया जाता है। तत्पश्चात् निकाय का तापमान $$75^{\circ} \mathrm{C}$$ पाया जाता है। $$\mathrm{T}$$ का मान होगा :
(दिया है : कमरे का तापमान $$=30^{\circ} \mathrm{C}$$, ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा $$=0.1 \mathrm{~cal} / \mathrm{gm}^{\circ} \mathrm{C}$$ )
Atsakymas(C)$$1250^{\circ} \mathrm{C}$$ - 20
एक द्रव्यमान $$\mathrm{M}$$ एवं लम्बाई $$l$$ की पतली एवं एक समान छड़ का एक सिरा धुराग्रस्त है जिससे कि वह एक ऊर्ध्वाधर समतल में घूम सकती है (चित्र देखिये)। धुरी का घर्षण नगण्य है। छड़ के दूसरे सिरे को धुरी के ऊपर ऊध्र्वाधर रखकर छोड़ दिया जाता है। जब छड़ ऊर्ध्व से $$\theta$$ कोण बनाती है तो उसका कोणीय त्वरण होगा :
Atsakymas(B)$$\frac{2 g}{3 l} \sin \theta$$ - 21$$\mathrm{m}=10^{-2} \mathrm{~kg}$$ द्रव्यमान का एक पिण्ड एक माध्यम में जा रहा है और एक घर्षण बल $$\mathrm{F}=-\mathrm{k} v^{2}$$ का अनुभव करता है। पिण्ड का प्रारम्भिक वेग $$v_{0}=10 \mathrm{~ms}^{-1}$$ है। यदि $$10 \mathrm{~s}$$ के बाद उसकी ऊर्जा $$\frac{1}{8} \mathrm{mv}_{0}^{2}$$ है तो $$\mathrm{k}$$ का मान होगा :Atsakymas(D)$$10^{-1} \mathrm{~kg} \mathrm{~m}^{-1} \mathrm{~s}^{-1}$$
- 23
निम्न प्रेक्षणों को केशिका विधि से पानी का पृष्ठ तनाव $$\mathrm{T}$$ नापने के लिये किया जाता है।
केशिका का व्यास, $$\mathrm{D}=1.25 \times 10^{-2} \mathrm{~m}$$
पानी का चढ़ाव, $$\mathrm{h}=1.45 \times 10^{-2} \mathrm{~m}$$
$$\mathrm{g}=9.80 \mathrm{~m} / \mathrm{s}^{2}$$ तथा सरलीकृत सम्बन्ध $$\mathrm{T}=\frac{\mathrm{rhg}}{2} \times 10^{3} \mathrm{~N} / \mathrm{m}$$, को उपयोग करते हुए पृष्ठ तनाव में सम्भावित त्रुटि का निकटतम मान होगा :
Atsakymas(C)1.5 % - 26द्रव्यमान $$\mathrm{m}$$ एवं आरम्भिक वेग $$v$$ के एक कण- $$\mathrm{A}$$ की टक्कर द्रव्यमान $$\frac{\mathrm{m}}{2}$$ के स्थिर कण- $$\mathrm{B}$$ से होती है। यह टक्कर सम्मुख एवं प्रत्यास्थ है। टक्कर के बाद डि-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्यों $$\lambda_{A}$$ एवं $$\lambda_{B}$$ का अनुपात होगा :Atsakymas(B)$$\frac{\lambda_{\mathrm{A}}}{\lambda_{\mathrm{B}}}=2$$

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